Ashtakam

कालभैरव अष्टकम् | सम्पूर्ण पाठ, भावार्थ और महात्म्य

कालभैरव अष्टकम् की महिमा

कालभैरव अष्टकम्, भगवान कालभैरव के प्रति भक्ति का एक विशेष स्तोत्र है। यह अष्टकश्लोक उन भक्तों के लिए अभिनव उपाय प्रस्तुत करता है, जो भक्ति, साधना और मोक्ष की प्राप्ति के लिए तत्पर हैं। इस स्तोत्र की नियमित पाठ से भक्तों को मानसिक शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है।

स्तोत्र का महत्व

कालभैरव अष्टकम् का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक ही सीमित नहीं है। यह स्तोत्र व्यक्ति की आंतरिक शक्ति को जागृत करता है एवं उसके जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सहायता करता है। जो भक्त इस अष्टक को श्रद्धा सहित पाठ करते हैं, उन्हें भगवान कालभैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कैसे करें कालभैरव अष्टकम् का पाठ

कालभैरव अष्टकम् का पाठ करने के लिए, सबसे पहले एक स्वच्छ स्थान का चयन करें। ध्यान एवं साधना के लिए सजग रहना आवश्यक है। अष्टकम का पाठ सुबह या शाम के समय करना श्रेष्ठ रहता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ पाठ करने से भक्त को त्वरित लाभ होते हैं तथा उसकी आध्यात्मिक प्रगति होती है।

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कालभैरव अष्टकम्
कालभैरव अष्टकम् | Kaal Bhairav Ashtakam Lyrics in Sanskrit

🕉️ कालभैरव अष्टकम्

Kaal Bhairav Ashtakam Lyrics (Sanskrit)

कालभैरव अष्टकम् (Kaal Bhairav Ashtakam) आदि शंकराचार्य द्वारा रचित प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसमें भगवान कालभैरव की स्तुति की गई है जो वाराणसी (काशी) के अधिपति और रक्षक माने जाते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से भय, शोक, मोह, पाप और बाधाओं का नाश होता है तथा भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

देवराज सेव्यमान पावनाङ्घ्रि पङ्कजं
व्यालयज्ञ सूत्रमिन्दु शेखरं कृपाकरम् ।
नारदादि योगिवृन्द वन्दितं दिगंबरं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ १॥
भानुकोटि भास्वरं भवाब्धितारकं परं
नीलकण्ठम् ईप्सितार्थ दायकं त्रिलोचनम् ।
कालकालम् अंबुजाक्षम् अक्षशूलम् अक्षरं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥२॥
शूलटङ्क पाशदण्ड पाणिमादि कारणं
श्यामकायम् आदिदेवम् अक्षरं निरामयम् ।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥३॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ।
विनिक्वणन् मनोज्ञहेमकिङ्किणी लसत्कटिं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥४॥
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाश मोचकं सुशर्मदायकं विभुम् ।
स्वर्णवर्णशेषपाश शोभिताङ्गमण्डलं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ ५॥
रत्नपादुका प्रभाभिराम पादयुग्मकं
नित्यम् अद्वितीयम् इष्टदैवतं निरञ्जनम् ।
मृत्युदर्पनाशनं कराळदंष्ट्रमोक्षणं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥६॥
अट्टहास भिन्नपद्मजाण्डकोश सन्ततिं
दृष्टिपातनष्टपाप जालमुग्रशासनम् ।
अष्टसिद्धिदायकं कपाल मालिकन्धरं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥७॥
भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोक पुण्यपापशोधकं विभुम् ।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥८॥
कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं
ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम् ।
शोक मोह दैन्य लोभ कोप ताप नाशनं
ते प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रि सन्निधिं ध्रुवम् ॥९॥

इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं कालभैरवाष्टकं संपूर्णम् ॥

✨ कालभैरव अष्टकम् के लाभ

  • भय, पाप और शोक का नाश करता है।
  • साधक को भक्ति, विवेक और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
  • काशी के अधिपति भगवान भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • मोक्ष और शांति की ओर साधक को अग्रसर करता है।
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