दुर्गा चालीसा |Durga Chalisa | Maa Durga Ki Mahima

दुर्गा चालीसा का परिचय
दुर्गा चालीसा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्तोत्र है, जो देवी दुर्गा की आराधना के लिए लिखा गया है। यह चालीसा सर्दनारायण द्वारा रचित है और इसमें देवी दुर्गा की महिमा, शक्ति और भक्ति का वर्णन किया गया है। भक्त इसे विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान पाठ करते हैं, जिससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा, मनोबल और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।
दुर्गा चालीसा का महत्व
- यह चालीसा भक्तों को आस्था और भक्ति में गहराई लाने में मदद करती है।
- इसे पढ़ने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
- संकट के समय इसका पाठ करना विशेष लाभकारी माना जाता है।
- नियमित पाठ से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, सुख-शांति और समृद्धि आती है।
दुर्गा चालीसा के लाभ
- जीवन से दुख, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- आत्मबल और साहस में वृद्धि होती है।
- परिवार में शांति, सुख और समृद्धि आती है।
- भक्त की रक्षा होती है और शत्रु नष्ट होते हैं।
- ध्यान और भक्ति से मानसिक शांति मिलती है।
- सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है।

दुर्गा चालीसा का पाठ कैसे करें
- पाठ के लिए शांत और स्वच्छ स्थान चुनें।
- देवी दुर्गा का ध्यान करते हुए भक्ति भाव से पाठ शुरू करें।
- रोज़ाना कुछ समय निकालकर पाठ करने से माँ की कृपा मिलती है।
- मध्यम गति में पाठ करें ताकि 6–7 मिनट में पूरा हो जाए।
- पाठ के दौरान ध्यान लगाना और मन को शुद्ध रखना महत्वपूर्ण है।
दुर्गा चालीसा का सही समय
- नवरात्रि के दिनों में सुबह या शाम।
- संकट या कठिनाई के समय, मन को शांत रखकर।
- विशेष अवसरों पर जैसे पूजा, हवन या यज्ञ में।
पूर्ण दुर्गा चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥
अतिरिक्त विषय और टिप्स
1. दुर्गा चालीसा का जाप और मंत्र
- जाप करते समय “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का उच्चारण लाभकारी माना जाता है।
- पाठ के दौरान ध्यान केंद्रित करने से आध्यात्मिक शक्ति और मन की शांति बढ़ती है।
2. नवरात्रि में पाठ का महत्व
- नौ दिनों तक नियमित पाठ से माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- शरीर, मन और आत्मा की सफाई होती है।
- घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
3. दुर्गा चालीसा और मानसिक स्वास्थ्य
- तनाव, चिंता और भय कम करने में मदद करती है।
- नियमित पाठ से मानसिक स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- ध्यान और भक्ति के माध्यम से ध्यान शक्ति और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।
4. भक्ति गीत और पाठ का संगीत
- दुर्गा चालीसा को धीमी मधुर धुन पर गाने से भक्ति भाव और ऊर्जा बढ़ती है।
- पुरुष या महिला स्वर में भी इसे सुन सकते हैं।




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