Chalisha

शिव चालीसा | भक्ति, शांति और सुख-समृद्धि पाने का स्तोत्र

शिव चालीसा का महत्व

शिव चालीसा, भगवान शिव की आराधना का एक सशक्त माध्यम है। यह स्तोत्र हमें श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। शिव चालीसा का पाठ करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

शिव चालीसा के प्रमुख लाभ

शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से अनेक लाभ होते हैं। इसे पढ़ने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति में सुधार होता है और आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। कहते हैं कि यह चालीसा आपके कार्यों में सफलता लाने और कठिनाइयों को दूर करने में सहायक है। भगवान शिव की कृपा से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और व्यक्ति में आत्मविश्वास का संचार होता है।

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कैसे करें शिव चालीसा का पाठ

शिव चालीसा का पाठ करना बेहद सरल है। इसे सुबह या शाम किसी भी समय आराम से किया जा सकता है। पाठ करते समय आपको एक शांत जगह का चयन करना चाहिए, जहाँ आप ध्यान से भगवान शिव के गुणों का स्मरण कर सकें। अध्यात्मिकता के साथ पाठ करने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है। नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ करके आप अपने जीवन में खुशियाँ और संतोष ला सकते हैं।

शिव चालीसा
शिव चालीसा | Shiv Chalisa Lyrics in Hindi & Romanized | लाभ, विधि, FAQ
ॐ नमः शिवाय

शिव चालीसा (Shiv Chalisa) – पूर्ण पाठ

हिंदी (देवनागरी) और रोमन हिंदी • लाभ • पाठ-विधि • FAQ

शिव चालीसा — देवनागरी

॥ दोहा॥ श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन छार लगाये ॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देख नाग मुनि मोहे ॥ मैना मातु की हवै दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥ तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥ किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥ दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥ वेद नाम महिमा तव गाई । अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला । जरे सुरासुर भये विहाला ॥ कीन्ह दया तहँ करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥ पूजन रामचंद्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥ सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भये प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥ जय जय जय अनंत अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै ॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । यहि अवसर मोहि आन उबारो ॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥ मातु पिता भ्राता सब कोई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु अब संकट भारी ॥ धन निर्धन को देत सदाहीं । जो कोई जांचे वो फल पाहीं ॥ अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥ शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । नारद शारद शीश नवावैं ॥ नमो नमो जय नमो शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥ जो यह पाठ करे मन लाई । ता पार होत है शम्भु सहाई ॥ ॠनिया जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥ पुत्र हीन कर इच्छा कोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा । तन नहीं ताके रहे कलेशा ॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥ जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्तवास शिवपुर में पावे ॥ कहे अयोध्या आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥ ॥ दोहा ॥ नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीस। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥ मंगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत् चौसठ जान । अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥ ॥ इति शिव चालीसा ॥

नोट: पाठ से पहले और बाद में “ॐ नमः शिवाय” का जप करना शुभ माना जाता है।

Shiv Chalisa — Romanized (उच्चारण सहायता)

|| Doha || Shree Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujan. Kahat Ayodhya Daas Tum, Dehu Abhay Vardaan. Jai Girija Pati Deen Dayala, Sada Karat Santan Pratipala. Bhaal Chandrama Sohat Nike, Kanan Kundal Naagphani Ke. Ang Gaur Shir Gang Bahaye, Mundmaal Tan Chhaar Lagaaye. Vastra Khaal Baaghambar Sohe, Chhavi Ko Dekh Naag Muni Mohe. Maina Maatu Ki Havai Dulaari, Baam Ang Sohat Chhavi Nyaari. Kar Trishool Sohat Chhavi Bhaari, Karat Sada Shatrun Kshayakaari. Nandi Ganesh Sohai Tahan Kaise, Saagar Madhya Kamal Hai Jaise. Kaartik Shyaam Aur Ganraau, Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kaau. Devan Jabahin Jaay Pukaara, Tab Hi Dukh Prabhu Aap Nivaara. Kiya Upadrav Taarak Bhaari, Devan Sab Mili Tumahi Juhari. Turat Shadaanana Aap Pathaayau, Lavanimesh Mahin Maar Girayau. Aap Jalandhar Asur Sanhaara, Suyash Tumhaar Vidit Sansaara. Tripuraasur San Yuddh Machaayi, Sabahin Kripaa Kar Leen Bachaayi. Kiya Tapahin Bhaagirath Bhaari, Purab Pratijna Taasu Puraari. Daanin Maham Tum Sam Kou Naahin, Sevak Stuti Karat Sadaahin. Ved Naam Mahimaa Tav Gaayi, Akath Anaadi Bhed Nahi Paayi. Pragat Udadhi Manthan Mein Jwaalaa, Jare Suraasur Bhaye Vihaalaa. Keenh Dayaa Tahan Kari Sahaayi, Neelkanth Tab Naam Kahaayi. Poojan Ramchandra Jab Keenhaa, Jeet Ke Lank Vibhishan Deenhaa. Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhaari, Keenhi Pareeksha Tabahin Puraari. Ek Kamal Prabhu Raakheu Joi, Kamal Nayan Poojan Chahan Soi. Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar, Bhaye Prasann Diye Ichchhit Var. Jai Jai Jai Anant Avinaashi, Karat Kripaa Sab Ke Ghatvaasi. Dusht Sakal Nit Mohi Sataavai, Bhramat Rahe Mohi Chain Na Aavai. Traahi Traahi Main Naath Pukaara, Yahi Avasar Mohi Aan Ubaara. Lai Trishool Shatrun Ko Maaro, Sankat Se Mohi Aan Ubaaro. Maatu Pita Bhraata Sab Koi, Sankat Mein Poochat Nahi Koi. Swaami Ek Hai Aas Tumhaari, Aay Harahu Ab Sankat Bhaari. Dhan Nirdhan Ko Det Sadaahin, Jo Koi Jaanche Vo Phal Paahin. AStuti Kehi Vidhi Karoon Tumhaari, Kshamahu Naath Ab Chook Hamaari. Shankar Ho Sankat Ke Naashan, Mangal Kaaran Vighna Vinaashan. Yogi Yati Muni Dhyaan Lagaaven, Narad Sharad Sheesh Nawaaven. Namo Namo Jai Namo Shivaya, Sur Brahmaadik Paar Na Paaya. Jo Yah Paath Kare Man Laai, Taa Paar Hot Hai Shambhu Sahaayi. Riniyaa Jo Koi Ho Adhikaari, Paath Kare So Paavan Haari. Putra Heen Kar Ichchha Koi, Nishchay Shiv Prasaad Tehi Hoi. Pandit Trayodashi Ko Laave, Dhyaan Purvak Hom Karaave. Trayodashi Vrat Kare Hamesha, Tan Nahi Taake Rahe Kalesha. Dhoop Deep Naivedya Chadhaave, Shankar Sammukh Paath Sunaave. Janm Janm Ke Paap Nasaave, Antavaas Shivpur Mein Paave. Kahe Ayodhyaa Aas Tumhaari, Jaani Sakal Dukh Harahu Hamaari. || Doha || Nitt Nem Kar Praatah Hi, Paath Karoon Chalees. Tum Meri Manokamna, Poorn Karo Jagdeesh. Mangasar Chhathi Hemant Ritu, Samvat Chausath Jaan. AStuti Chaleesa Shivahi, Poorn Keen Kalyaan. || Iti Shiv Chaleesa ||

शिव चालीसा पाठ के लाभ

  • संकटों से मुक्ति और भय का नाश
  • घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि
  • रोग-शोक और मानसिक तनाव में कमी
  • आध्यात्मिक बल, एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि
  • कर्ज और आर्थिक उलझनों में राहत

सरल पाठ-विधि

  1. स्नान कर स्वच्छ स्थान पर बैठे और दीपक जलाएँ
  2. “ॐ नमः शिवाय” का जप कर मानसिक एकाग्रता बनायें
  3. देवनागरी/रोमन में स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें
  4. अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें

FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिव चालीसा कब पढ़ना चाहिए?
प्रातःकाल या संध्या समय शांत मन से पढ़ना उत्तम है।
क्या शिव चालीसा रोज़ पढ़ सकते हैं?
हाँ, इसे प्रतिदिन पढ़ना लाभकारी है और इसका कोई निषेध नहीं है।
क्या शिव चालीसा कर्ज मुक्ति में सहायक है?
श्रद्धा और भक्ति से पाठ करने पर मानसिक बल मिलता है और आर्थिक परेशानियों में राहत मिलती है।
उच्चारण कठिन हो तो क्या करें?
ऊपर दिए Romanized पाठ के साथ धीरे-धीरे पढ़ें और नियमित अभ्यास करें।
अस्वीकरण: यह पृष्ठ भक्ति एवं अध्ययन हेतु है।

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