बजरंग बाण का पाठ: संकट मोचन और जीवन में शक्ति का वरदान

बजरंग बाण (Bajrang Baan) – हनुमान जी का अद्भुत स्तोत्र
बजरंग बाण हनुमान जी का एक शक्तिशाली स्तोत्र है। इसे पढ़ने और सुनने से हर प्रकार के भय, बाधा और संकट दूर होते हैं। भक्तगण श्रद्धा और विश्वास से जब इसका पाठ करते हैं, तो उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
बजरंग बाण का महत्व
बजरंग बाण, जिसे हिंदू धर्म में एक शक्तिशाली मंत्र माना जाता है, भगवान हनुमान की स्तुति करते हुए उनकी शक्ति और साहस को दर्शाता है। यह मंत्र न केवल भक्तों को मानसिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि उन्हें जीवन में कठिनाइयों से भी उबरने में मदद करता है। बजरंग बाण का पाठ विभिन्न संकटों से रक्षा के लिए किया जाता है और यह एक पवित्र साधना का प्रतीक है।
बजरंग बाण का पाठ कैसे करें
बजरंग बाण का पाठ करने के लिए एक शांत स्थान का चयन करें और प्रभु हनुमान की तस्वीर या मूर्ति के आगे दीपक जलाएं। अपनी मानसिकता को केंद्रित करते हुए, मंत्र का उच्चारण ध्यानपूर्वक करें। यह ध्यान रखें कि पाठ करते समय आपका मन शांत और स्थिर हो। नियमित रूप से इसका जाप करने से व्यक्ति में आंतरिक शक्ति का संचार होता है और संकल्प शक्ति में वृद्धि होती है।
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कब और क्यों करें बजरंग बाण का पाठ
Bजरंग बाण का पाठ संकट के समय, जैसे मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाई, या स्वास्थ्य समस्याएं होने पर किया जा सकता है। जब व्यक्ति स्वयं को असहाय महसूस करता है, तो बजरंग बाण उसका मार्गदर्शक बनता है। यह एक विश्वास, सुरक्षा और समर्पण का प्रतीक है, जो भक्तों को आत्मविश्वास और साहस प्रदान करता है। इसलिए, बजरंग बाण का पाठ एक शक्तिशाली साधना बनी हुई है, जो अनगिनत भक्तों के लिए राहत और सुरक्षा का साधन बनता है।

संपूर्ण बजरंग बाण पाठ
दोहा :
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान ॥
चौपाई :
जय हनुमन्त संत हितकारी ।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥
जन के काज बिलम्ब न कीजै ।
आतुर दौरि महासुख दीजै ॥
जैसे कूदी सिन्धु महि पारा ।
सुरसा बदन पैठी विस्तारा ॥
आगे जाय लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका ॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परम-पद लीना ॥
बाग उजारि सिन्धु मह बोरा ।
अति आतुर जमकातर तोरा ॥
अक्षय कुमार मारि संहारा ।
लूम लपेटि लंक को जारा ॥
लाह समान लंक जरि गई ।
जय-जय धुनि सुरपुर में भई ॥
अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी ।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥
जय जय लखन प्रान के दाता ।
आतुर होई दु:ख करहु निपाता ॥
जै गिरिधर जै जै सुख सागर ।
सुर-समूह-समरथ भट-नागर ॥
ओम हनु हनु हनु हनुमंत हठीले ।
बैरिहि मारु बज्र की कीले ॥
गदा बज्र लै बैरिहि मारो ।
महाराज प्रभु दास उबारो ॥
ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ ॥
ओम ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा ।
ओम हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा ॥
सत्य होहु हरी शपथ पायके ।
राम दूत धरु मारू जायके ॥
जय जय जय हनुमन्त अगाधा ।
दुःख पावत जन केहि अपराधा ॥
पूजा जप-तप नेम अचारा ।
नहिं जानत हो दास तुम्हारा ॥
वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं ।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥
पायं परौं कर जोरी मनावौं ।
येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
जय अंजनी कुमार बलवंता ।
शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥
बदन कराल काल कुलघालक।
राम सहाय सदा प्रतिपालक ॥
भूत प्रेत पिसाच निसाचर।
अगिन वैताल काल मारी मर ॥
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की ।
राखउ नाथ मरजाद नाम की ॥
जनकसुता हरि दास कहावो ।
ताकी शपथ विलम्ब न लावो ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा ।
सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ॥
चरण शरण कर जोरि मनावौं ।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई ।
पायँ परौं, कर जोरि मनाई ॥
ओम चं चं चं चं चपल चलंता ।
ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ॥
ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल ।
ओम सं सं सहमि पराने खल-दल ॥
अपने जन को तुरत उबारौ ।
सुमिरत होय आनंद हमारौ ॥
यह बजरंग बाण जेहि मारै।
ताहि कहो फिर कोन उबारै ॥
पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षा करैं प्रान की ॥
यह बजरंग बाण जो जापैं ।
ताते भूत-प्रेत सब कापैं ॥
धूप देय अरु जपै हमेशा ।
ताके तन नहिं रहै कलेसा ॥
दोहा :
प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥
📌 बजरंग बाण पाठ करने का सही तरीका
- मंगलवार और शनिवार को विशेष फलदायी।
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
- श्रद्धा और विश्वास के साथ पूरे मन से पाठ करें।
- अंत में हनुमान जी से अपने मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें।
🎧 सुनें बजरंग बाण का पाठ
🙏 निष्कर्ष
बजरंग बाण केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि हनुमान जी का वह दिव्य कवच है, जो हर संकट से रक्षा करता है। यदि इसे नित्य श्रद्धा और भक्ति भाव से पढ़ा जाए, तो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और शांति की प्राप्ति होती है।




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