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श्रीकृष्णाष्टकम्: जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए

श्रीकृष्ण का महत्व

भगवान श्रीकृष्ण हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण देवी-देवता हैं। उनके बारे में अनेक ग्रंथों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। श्रीकृष्णाष्टकम् एक ऐसा स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भक्तों के लिए spiritual upliftment का साधन है।

श्रीकृष्णाष्टकम् का पाठ

श्रीकृष्णाष्टकम् का नियमित पाठ भक्तों के जीवन में शांति और खुशहाली लाता है। यह स्तोत्र हमें श्रीकृष्ण की अनुकंपा प्राप्त करने में मदद करता है। इसके अष्टकश्लोकों में श्रीकृष्ण की लीलाओं और गुणों का वर्णन है। श्रद्धा से किया गया पाठ न केवल भक्ति में वृद्धि करता है, बल्कि आत्मिक शुद्धि का भी साधन है।

सीखें और अपनाएँ

श्रीकृष्णाष्टकम् का पाठ केवल एक धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि यह एक जीवन जीने की पद्धति भी है। इसमें श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव शामिल है। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे प्रतिदिन इसका पाठ करें। इससे मानसिक शांति और एकाग्रता में वृद्धि होती है, जो जीवन की नित्य समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है।

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श्रीकृष्णाष्टकम्

🌸 श्रीकृष्णाष्टकम् — शंकराचार्य कृत 🌸

भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं
अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥१॥

मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं
विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं
महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णावारणम् ॥२॥

कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं
व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम् ।
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया
युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ॥३॥

सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजं
दधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ।
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं
समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ॥४॥

भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं
यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।
दृगन्तकान्तभंगिनं सदा सदालिसंगिनं
दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसम्भवम् ॥५॥

गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं
सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनम् ।
नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलम्पटं
नमामि मेघसुन्दरं तडित्प्रभालसत्पटम् ॥६॥

समस्तगोपनन्दनं हृदम्बुजैकमोदनं
नमामि कुंजमध्यगं प्रसन्नभानुशोभनम् ।
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं
रसालवेणुगायकं नमामि कुंजनायकम् ॥७॥

विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं
नमामि कुंजकानने प्रव्रद्धवन्हिपायिनम् ।
किशोरकान्तिरंजितं दृगंजनं सुशोभितं
गजेन्द्रमोक्षकारिणं नमामि श्रीविहारिणम् ॥८॥

यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा
मया सदैव गीयतां तथा कृपा विधीयताम् ।
प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्य यः पुमान
भवेत्स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान ॥९॥

🌼 इति श्रीमद् शंकराचार्यकृतं श्रीकृष्णाष्टकं सम्पूर्णम् 🌼

✨ प्रतिदिन इस श्रीकृष्णाष्टकम् का पाठ करने से पापों का नाश, मन की शांति और भक्ति की वृद्धि होती है। ✨

🎶 श्रीकृष्णाष्टकम् Audio/Video

महत्व और लाभ (Significance & Benefits)

  • श्रीकृष्णाष्टकम् का पाठ करने से मन को शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • यह स्तोत्र विशेष रूप से भक्तियोग के लिए उपयुक्त है।
  • घर में प्रतिदिन या विशेष दिनों (जैसे जन्माष्टमी, एकादशी) पर इसका पाठ करने से वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है।
  • इसे सुबह या शाम को श्रद्धा और भक्ति भाव से पढ़ना चाहिए।

पाठ विधि (Recitation Method)

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएँ।
  3. श्रीकृष्णाष्टकम् के 8 श्लोकों का क्रम से पाठ करें।
  4. अंत में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
  5. प्रसाद अर्पित करें और शांति मंत्र पढ़ें।

7. FAQs (Website के लिए उपयोगी)

Q1. श्रीकृष्णाष्टकम् किसने लिखा?
👉 इसका रचनाकार आदि शंकराचार्य माने जाते हैं।

Q2. कब पाठ करना सबसे अच्छा है?
👉 प्रातःकाल, सायंकाल, जन्माष्टमी या एकादशी के दिन।

Q3. क्या इसे आम लोग भी पढ़ सकते हैं?
👉 हाँ, कोई भी श्रद्धाभाव से पढ़ सकता है।

Q4. क्या इसका कोई विशेष फल है?
👉 भक्ति, शांति, और जीवन में सकारात्मकता आती है।

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