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संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र – अर्थ, विधि और फल | Sankasht Nashak Ganesh Stotra

संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र का पूर्ण पाठ, अर्थ, जप विधि और लाभ जानिए। यह स्तोत्र विघ्न, भय और संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।

🕉️ संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र – विघ्नों के नाश का दिव्य मंत्र

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को
विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और सिद्धिदाता कहा गया है।
किसी भी शुभ कार्य से पहले
गणपति पूजन इसलिए किया जाता है
ताकि जीवन के सभी विघ्न और बाधाएँ दूर हों।

संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र
नारद पुराण में वर्णित
एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है,
जिसका नियमित पाठ
कष्ट, भय और असफलताओं से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।

संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र

📜 संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र (मूल पाठ)

श्रीगणेशाय नमः । नारद उवाच ।

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये ॥ १॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥ ३॥

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥ ४॥

द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥ ५॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥ ६॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥ ७॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥ ८॥

॥ इति श्रीनारदपुराणे सङ्कष्टनाशन-गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

🌿 स्तोत्र का भावार्थ (सरल अर्थ)

यह स्तोत्र भगवान गणेश के
12 दिव्य नामों का वर्णन करता है, जैसे—

  • वक्रतुण्ड
  • एकदन्त
  • कृष्णपिङ्गाक्ष
  • गजवक्त्र
  • लंबोदर
  • विकट
  • विघ्नराज
  • धूम्रवर्ण
  • भालचंद्र
  • विनायक
  • गणपति
  • गजानन

इन नामों का त्रिकाल (सुबह-दोपहर-शाम) स्मरण करने से
मनुष्य के जीवन से सभी विघ्न, भय और बाधाएँ दूर होती हैं।

Also Read:- श्री राम रक्षा स्तोत्रम् | Shri Ram Raksha Stotram | पूर्ण पाठ व महत्व


🔱 संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र का महत्व

नारद पुराण के अनुसार—

✔ यह स्तोत्र संकटों का नाश करता है
✔ बुद्धि, विद्या और विवेक प्रदान करता है
✔ कार्यों में सफलता दिलाता है
✔ नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है

इसी कारण इसे
“संकष्टनाशक” कहा गया है


🌸 स्तोत्र पाठ से मिलने वाले फल

स्तोत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है—

  • 📘 विद्यार्थी को विद्या प्राप्त होती है
  • 💰 धन की इच्छा रखने वाले को धन मिलता है
  • 👶 संतान चाहने वाले को संतान सुख मिलता है
  • 🕊️ मोक्ष की कामना करने वाले को मोक्ष-मार्ग मिलता है

यह स्तोत्र सर्वसिद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।


🧘‍♂️ संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र की जप विधि

✔ प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
✔ गणेश जी का ध्यान करें
✔ दीपक जलाएँ
✔ शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें
✔ कम से कम 6 महीने नियमित जप करें

शास्त्रों में कहा गया है कि
6 महीने में फल और
1 वर्ष में पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है।


📿 दान और विशेष विधान

स्तोत्र के अनुसार यदि कोई भक्त—

  • इस स्तोत्र को लिखकर
  • आठ ब्राह्मणों को दान करता है

तो उसे
भगवान गणेश की विशेष कृपा से
सम्पूर्ण विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है।


🌺 आज के जीवन में स्तोत्र की प्रासंगिकता

आज के समय में—

  • तनाव
  • असफलता
  • भय
  • मानसिक अशांति

आम हो गई है।
ऐसे समय में
संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र
मन को स्थिर, सकारात्मक और आत्मविश्वासी बनाता है।


🌸 समापन (Devotional Close)

भगवान गणेश
केवल एक देवता नहीं,
बल्कि बुद्धि, विवेक और समाधान के प्रतीक हैं।

जो श्रद्धा से
संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र का पाठ करता है,
उसके जीवन से
विघ्न स्वयं दूर हो जाते हैं।

🙏 जय श्री गणेश 🙏

FAQ – संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र


❓ संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र क्या है?

उत्तर:
संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र नारद पुराण में वर्णित भगवान गणेश का एक प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसका नियमित पाठ जीवन के कष्ट, विघ्न और बाधाओं को दूर करने में सहायक माना गया है।


❓ इस स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

उत्तर:
इस स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल स्नान के बाद, शांत मन से करना श्रेष्ठ माना गया है। चाहें तो इसे त्रिकाल (सुबह, दोपहर, शाम) भी पढ़ा जा सकता है।


❓ संकष्टनाशक गणेश स्तोत्र के क्या लाभ हैं?

उत्तर:
इस स्तोत्र के पाठ से विद्या, धन, संतान सुख, कार्य सिद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन के विघ्न और भय दूर होते हैं।


❓ क्या विद्यार्थी इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं?

उत्तर:
हाँ, यह स्तोत्र विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे एकाग्रता, स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होती है।


❓ इस स्तोत्र का कितने समय तक पाठ करना चाहिए?

उत्तर:
शास्त्रों के अनुसार 6 महीने नियमित पाठ से फल की प्राप्ति होती है और 1 वर्ष तक पाठ करने से पूर्ण सिद्धि मिलती है।


❓ क्या इस स्तोत्र का पाठ संकष्टी चतुर्थी को विशेष फल देता है?

उत्तर:
हाँ, संकष्टी चतुर्थी के दिन इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना गया है।

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