श्री गणेश आरती – भक्तिमय आराधना और लाभ

श्री गणेश आरती का महत्व
श्री गणेश आरती हिंदू धर्म के प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है। यह आरती भगवान गणेश को समर्पित होती है, जो सभी विघ्नों और बाधाओं के नाशक माने जाते हैं। इस आरती का उद्देश्य भगवान गणेश का आभार व्यक्त करना और उनकी कृपा को प्राप्त करना है। गणेश आरती का पाठ श्रद्धा और भक्ति से किया जाता है, जिससे भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
आरती के समय का महत्व
जब भी आरती का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, यह आवश्यक होता है कि भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इसमें भाग लें। आरती के समय दीप जलाना और अन्य पूजन सामग्री का प्रयोग करना महत्वपूर्ण होता है। इस समय भक्त गण भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करते हुए आरती गाते हैं, जो सभी उपस्थित भक्तों के लिए दिव्य अनुभव प्रदान करती है।
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गणेश आरती के बोल
गणेश आरती के बोल आमतौर पर साधारण होते हैं, जिन्हें आसानी से गाया जा सकता है। ये बोल भक्तों के हृदय से निकलकर सच्चे भावों के साथ भगवान गणेश के प्रति प्रेम और श्रद्धा का परिचायक होते हैं। आरती के अंत में सभी भक्त ‘जय गणेश देवा’ का जयकारा लगाते हैं, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति का संदेश फैलता है।

श्री गणेश आरती
नीचे श्री गणेश जी की पूर्ण आरती दी गयी है — आप इसे श्रद्धा व भक्ति के साथ पढ़ सकते हैं या वेबसाइट के ऑडियो प्लेयर के साथ सुन सकते हैं। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं; इनकी आरती से मन में शांति और घर में सुख-समृद्धि होती है।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भगवान गणेश की जय।




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