श्री पंचमुख हनुमत कवच | Full Mantra, अर्थ, लाभ और पाठ विधि

श्री पंचमुख हनुमत कवच एक अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य स्तोत्र है, जो भगवान हनुमान के पंचमुख (पाँच मुखों वाले) विराट स्वरूप की उपासना करता है। यह कवच भक्त को भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक शक्तियों, रोग, मानसिक अशांति और अदृश्य संकटों से सुरक्षा प्रदान करता है।
यह केवल मंत्र नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक रक्षा-कवच माना गया है।
श्री पंचमुख हनुमत कवच क्या है?
पंचमुख हनुमान जी का यह कवच पाँच दिव्य मुखों के माध्यम से जीवन के हर स्तर पर रक्षा करता है।
प्रत्येक मुख का अपना अलग-अलग आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व है, जो मिलकर पूर्ण सुरक्षा घेरा बनाता है।
पंचमुख हनुमान के पाँच मुखों का महत्व
🔹 1. पूर्वमुख – वानर मुख
साहस, आत्मबल और शत्रु-नाश का प्रतीक।
🔹 2. दक्षिणमुख – नरसिंह मुख
भय, नकारात्मक शक्तियों और दुष्ट प्रवृत्तियों का संहारक।
🔹 3. पश्चिममुख – गरुड़ मुख
सर्प दोष, विषबाधा और भूत-प्रेत बाधा से रक्षा।
🔹 4. उत्तरमुख – वराह मुख
रोग, ज्वर और पातालिक बाधाओं का नाश।
🔹 5. ऊर्ध्वमुख – अश्व (हयग्रीव) मुख
सभी शत्रुओं पर विजय, बुद्धि और नियंत्रण शक्ति।

श्री पंचमुख हनुमत कवच – सम्पूर्ण मूल संस्कृत मंत्र
।। हरि: ॐ ।।
॥ अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥
श्रीगणेशाय नमः।
ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य
ब्रह्मा ऋषिः ।
गायत्री छन्दः ।
पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता ।
ह्रीं बीजम् ।
श्रीं शक्तिः ।
क्रौं कीलकम् ।
क्रूं कवचम् ।
क्रैम् अस्त्राय फट् ।
इति दिग्बन्धः ॥
॥ श्री गरुड उवाच ॥
अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वाङ्गसुन्दर ।
यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमतः प्रियम् ॥१॥
पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम् ।
बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम् ॥२॥
पूर्वं तु वानरं वक्त्रं कोटिसूर्यसमप्रभम् ।
दंष्ट्राकरालवदनं भ्रुकुटीकुटिलेक्षणम् ॥३॥
अस्यैव दक्षिणं वक्त्रं नारसिंहं महाद्भुतम् ।
अत्युग्रतेजोवपुषं भीषणं भयनाशनम् ॥४॥
पश्चिमं गारुडं वक्त्रं वक्रतुण्डं महाबलम् ।
सर्वनागप्रशमनं विषभूतादिकृन्तनम् ॥५॥
उत्तरं सौकरं वक्त्रं कृष्णं दीप्तं नभोपमम् ।
पातालसिंहवेतालज्वररोगादिकृन्तनम् ॥६॥
ऊर्ध्वं हयाननं घोरं दानवान्तकरं परम् ।
येन वक्त्रेण विप्रेन्द्र तारकाख्यं महासुरम् ॥७॥
जघान शरणं तत्स्यात्सर्वशत्रुहरं परम् ।
ध्यात्वा पञ्चमुखं रुद्रं हनुमन्तं दयानिधिम् ॥८॥
खड्गं त्रिशूलं खट्वाङ्गं पाशमङ्कुशपर्वतम् ।
मुष्टिं कौमोदकीं वृक्षं धारयन्तं कमण्डलुम् ॥९॥
भिन्दिपालं ज्ञानमुद्रां दशभिर्मुनिपुङ्गवम् ।
एतान्यायुधजालानि धारयन्तं भजाम्यहम् ॥१०॥
प्रेतासनोपविष्टं तं सर्वाभरणभूषितम् ।
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ॥११॥
सर्वाश्चर्यमयं देवं हनुमद्विश्वतोमुखम् ।
पञ्चास्यमच्युतमनेकविचित्रवर्णवक्त्रम् ।
शशाङ्कशिखरं कपिराजवर्यम् ।
पीताम्बरादिमुकुटैरुपशोभिताङ्गम् ।
पिङ्गाक्षमाद्यमनिशं मनसा स्मरामि ॥१२॥
॥ फलश्रुति एवं प्रार्थना ॥
मर्कटेशं महोत्साहं सर्वशत्रुहरं परम् ।
शत्रुं संहर मां रक्ष श्रीमन्नापदमुद्धर ॥
ॐ हरिमर्कट मर्कट मन्त्रमिदं परिलिख्यति लिख्यति वामतले ।
यदि नश्यति नश्यति शत्रुकुलं यदि मुञ्चति मुञ्चति वामलता ॥
ॐ हरिमर्कटाय स्वाहा ॥
॥ पंचमुख नमस्कार मंत्र ॥
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय
पूर्वकपिमुखाय
सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा ॥
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय
दक्षिणमुखाय करालवदनाय
नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा ॥
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय
पश्चिममुखाय गरुडाननाय
सकलविषहराय स्वाहा ॥
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय
उत्तरमुखाय आदिवराहाय
सकलसंपत्कराय स्वाहा ॥
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय
ऊर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय
सकलजनवशकराय स्वाहा ॥
॥ समापन ॥
ॐ श्रीपञ्चमुखहनुमन्ताय
आञ्जनेयाय नमो नमः ॥
॥ हरि: ॐ ॥
श्री पंचमुख हनुमत कवच के चमत्कारी लाभ
✔ भय और असुरक्षा की भावना समाप्त होती है
✔ शत्रु बाधा और षड्यंत्र से रक्षा
✔ नकारात्मक ऊर्जा और बुरी दृष्टि का नाश
✔ मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि
✔ रोग, दुर्घटना और संकट से सुरक्षा
✔ घर-परिवार पर दिव्य सुरक्षा कवच
श्री पंचमुख हनुमत कवच पाठ विधि
- 📅 दिन: मंगलवार या शनिवार
- ⏰ समय: प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या संध्या
- 🪔 स्थान: स्वच्छ, शांत जगह
- 🙏 विधि:
- हनुमान जी का ध्यान करें
- दीपक जलाएँ
- पूरे भाव और श्रद्धा से कवच का पाठ करें
➡️ नियमित पाठ से इसका प्रभाव तेज़ और स्थायी होता है।
किन लोगों को यह कवच अवश्य पढ़ना चाहिए?
- जो बार-बार संकट में फँसते हों
- जिनके जीवन में शत्रु बाधा हो
- मानसिक तनाव या भय से पीड़ित लोग
- साधक और भक्त
- घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने हेतु
निष्कर्ष (Conclusion)
श्री पंचमुख हनुमत कवच भगवान हनुमान की करुणा और शक्ति का ऐसा स्वरूप है, जो भक्त को हर दिशा से सुरक्षा प्रदान करता है। श्रद्धा, विश्वास और नियमितता के साथ किया गया यह पाठ जीवन में अद्भुत सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
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🙏 अंतिम प्रार्थना
ॐ श्रीपञ्चमुखहनुमन्ताय आञ्जनेयाय नमो नमः॥
॥ हरि: ॐ ॥
📌 FAQ
❓ श्री पंचमुख हनुमत कवच क्या है?
उत्तर:
श्री पंचमुख हनुमत कवच भगवान हनुमान के पंचमुख (पाँच मुखों वाले) विराट स्वरूप की उपासना करने वाला शक्तिशाली रक्षा स्तोत्र है, जो भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा देता है।
❓ पंचमुख हनुमान के पाँच मुख कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
पंचमुख हनुमान के पाँच मुख हैं —
पूर्व (वानर), दक्षिण (नरसिंह), पश्चिम (गरुड़), उत्तर (वराह) और ऊर्ध्व (अश्व/हयग्रीव)।
❓ श्री पंचमुख हनुमत कवच के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
इस कवच के पाठ से भय नाश, शत्रु बाधा से रक्षा, नकारात्मक ऊर्जा का नाश, मानसिक शांति, आत्मबल और दिव्य सुरक्षा प्राप्त होती है।
❓ श्री पंचमुख हनुमत कवच का पाठ कब करना चाहिए?
उत्तर:
इस कवच का पाठ मंगलवार या शनिवार को, प्रातः या संध्या समय, श्रद्धा और नियम के साथ करना सर्वोत्तम माना जाता है।
❓ क्या पंचमुख हनुमत कवच का पाठ कोई भी कर सकता है?
उत्तर:
हाँ, कोई भी श्रद्धालु व्यक्ति शुद्ध मन और विश्वास के साथ इस कवच का पाठ कर सकता है। इसके लिए किसी विशेष दीक्षा की आवश्यकता नहीं होती।
❓ क्या यह कवच नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है?
उत्तर:
जी हाँ, शास्त्रों के अनुसार श्री पंचमुख हनुमत कवच भूत-प्रेत बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और बुरी दृष्टि से रक्षा करता है।



